दो बहनें – प्रेमचंद कहानी

5.0 02 दोनों बहनें दो साल के बाद एक तीसरे नातेदार के घर मिलीं और खूब रो-धोकर खुश हुईं तो बड़ी बहन रूपकुमारी ने देखा कि छोटी बहन रामदुलारी सिर से पाँव तक गहनों से लदी हुई है, कुछ उसका रंग खुल गया है, स्वभाव में कुछ गरिमा आ गयी …

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घासवाली कहानी प्रेमचंद – Ghaaswali Hindi Story by Munsi Premchand

4.7 06 घासवाली — मुंशी प्रेमचंद  मुलिया हरी-हरी घास का गट्ठा लेकर आयी, तो उसका गेहुआँ रंग कुछ तमतमाया हुआ था और बड़ी-बड़ी मद-भरी आँखो में शंका समाई हुई थी। महावीर ने उसका तमतमाया हुआ चेहरा देखकर पूछा – क्या है मुलिया, आज कैसा जी है? मुलिया ने कुछ जवाब न दिया …

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सफ़र की हद है वहां तक कि कुछ निशान रहे – राहत इन्दौरी

5.0 02 सफ़र की हद है वहां तक कि कुछ निशान रहे, चले चलो कि जहाँ तक ये आसमान रहे. ये क्या उठाये कदम और आ गयी मंजिल, मज़ा तो तब है कि पैरों में कुछ थकान रहे. वो शख्स मुझ को कोई जालसाज़ लगता है, तुम उसको दोस्त समझते …

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Saans Lena Bhi Kaisi Aadat Hai — Poem by Gulzar Sahab

4.6 05 Saans lena bhi kaisi aadat hai, jiye jaana bhi kya rawaayat hai.. Koi aahat nahin hai badan mein kahin, koi saaya nahin hai aankhon mein.. Paaon be-hiss hain chalte rehte hain, ek safar hai jo behta rehta hai.. Kitne barson se, kitni sadiyon se, Jiye jaate hain.. Jiye …

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Pompiye..

0.0 00 Pompiye dafan tha sadiyon se jahan ek tehzeeb thi posheeda wahan shehar khoda toh tawaarikh ke tukde nikle. Dheron pathraaye hue waqt ke safhon ko ulat kar dekha ek bhooli hui tehzeeb ke purze se bichhe the har-soo. munjamid laave mein akde hue insaanon ke guchchhe the wahan …

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