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Mazhar Imam Poetry / Shayari / Ghazals | मज़हर इमाम की शायरी

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Mazhar Imam Poetry / Ghazals Collection

mazhar imam poetMazhar Imam was born on March 12, 1928, in Darbhanga District of Bihar. Mazhar Imam acquired his degrees of M. A. in Urdu and Persian from the universities of Magadh and Bihar respectively. In 1951, Mazhar Imam started working for a daily newspaper named Carvan in Calcutta after which he joined All India Radio and retired from a very senior position in radio and television. Mazhar Imam is respected as one of the modern poets who brought a set of new idioms and a variety of new experiences to ghazal poetry. As Mazhar Imam also wrote criticism, he used his critical faculty to write a kind of poetry that distinguished him from other poets.
Mazhar Imam had authored thirteen books including four volumes of his Urdu poetry namely :  Zakhm-e-tamanna (1962), Rishta goonge safar ka (1974), Pichle Mausam ka phool (1988) and Band hota bazaar. In 1994 Mazhar Imam received the Sahitya Academy Award for his book, Pichle mausam ka phool. Mazhar Imam also pioneered free ghazal in Urdu although it could not hold the imagination of poets and their readers as it went against the essential nature of the ghazal. His experimentation with the traditional form of ghazal, however, showed his penchant for discovering the new and supplementing a literary tradition creatively. Mazhar Imam passed away in 2012.Read here all Mazhar Imam sahab’s Poetry collection on Gulzariyat.com

SN: Mazhar Imam Ghazals:
01. Ab Bhi Parde Hain Wahi Parda-dari To Dekho / Mazhar Imam

मज़हर इमाम की शायरी संग्रह हिंदी में

मज़हर इमाम का जन्म वर्ष 1928 में बिहार के दरभंगा जिले में हुआ था, जो उर्दू के कवि, शायर और आलोचक थे। मज़हर इमाम मगध विश्वविद्यालय से उर्दू और बिहार विश्वविद्यालय से फारसी में एमए की डिग्री प्राप्त करने के बाद, 1951 में कलकत्ता दैनिक समाचार पत्र कारवां से जुड़े और उसके बाद 1958 में ऑल इंडिया रेडियो में शामिल होने से पहले एक स्कूल शिक्षक के रूप में काम किया। ऑल इंडिया रेडियो में मज़हर इमाम ने तीन दशकों तक अपनी सेवाएं दी। मज़हर इमाम वर्ष 1988 में दूरदर्शन, श्रीनगर (जम्मू और कश्मीर) के निदेशक के रूप में सेवानिवृत्त हुए। मज़हर इमाम ने उर्दू शायरी के चार संस्करणों सहित तेरह पुस्तकें लिखी थी, जिसमें प्रमुख हैं: ज़ख्म-ए तमन्ना (1962), रिश्ता गूंगे सफ़र का (1974), पिछले मौसम का फूल (1988) और बंद होता बाज़ार आदि।
1994 में मज़हर इमाम को उनकी पुस्तक, ‘पिछले मौसम का फूल’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ। वे उर्दू शायरी में आजाद ग़ज़ल विधा के सूत्रपात हेतु जाने जाते हैं। 2012 में मज़हर इमाम का निधन हो गया ।यहाँ गुलज़ारियत डॉट कॉम पे आप मज़हर इमाम साहब की सभी शायरी / ग़ज़लों को हिंदी में पढ़ सकते हैं ।

क्रम संख्या: मज़हर इमाम की ग़ज़लें:
01. अब भी पर्दे हैं वही पर्दा-दरी तो देखो / मज़हर इमाम